लगातार तीसरी जीत, और मतपत्र पर एक नया विकल्प
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी फिर जीती और इस बार भारी जीत के साथ अपना बहुमत और बढ़ाया।
भाजपा ने 230 में से 165 सीटें जीतीं, यानी विधान सभा में भारी बहुमत।
यह पिछले चुनाव से 22 सीटें ज़्यादा थीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 58 सीटों के साथ पीछे रही।
क्या बदला
इस चुनाव में मतपत्र पर एक नया विकल्प जुड़ा: मतदाता किसी एक उम्मीदवार को चुनने के बजाय सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते थे।
इस विकल्प का नाम (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) था।
पूरे राज्य में 1.9% वोट नोटा को मिले।
भाजपा अब राज्य में लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला सुरखी, मध्य प्रदेश में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 141 वोट रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मल्हारगढ़, मध्य प्रदेश में रहा, 86.2%।
मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर इंदौर-2, मध्य प्रदेश में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 48.8% वोट आगे रहा।
किसी एक सीट पर सबसे ज़्यादा मतदाता इंदौर-5, मध्य प्रदेश में थे, जहाँ 3,08,110 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
पृष्ठभूमि
इससे राज्य में उसी पार्टी की जीत का सिलसिला और लंबा हुआ।