मध्य प्रदेश 1993 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 174 सीटें (54.4%)BJP: 117 सीटें (36.6%)BSP: 11 सीटें (3.4%)IND: 8 सीटें (2.5%)JD: 4 सीटें (1.3%)CPI: 2 सीटें (0.6%)CMM: 1 सीट (0.3%)CPM: 1 सीट (0.3%)अन्य (2 पार्टियाँ): 2 सीटें — KSM 1, RPI(K) 1बहुमत के लिए 161320सरकार बनाने के लिए 161
  • INC17454.4%
  • BJP11736.6%
  • BSP113.4%
  • निर्दलीय82.5%
  • JD41.3%
  • CPI20.6%
  • CMM10.3%
  • CPM10.3%
  • अन्य20.6%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस ने सत्ता वापस पाई

क्या हुआ

कांग्रेस राज्य विधान सभा में फिर सत्ता में लौटी और पिछले कार्यकाल में सरकार चला रही पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने विधान सभा में फिर से सत्ता हासिल की।

उसने विधान सभा की 320 सीटों में से 174 सीटें जीतीं।

यानी बहुमत से सिर्फ़ 13 सीटें ज़्यादा।

सत्ता से बाहर हुई भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने दम पर 117 सीटें जीतीं।

क्या बदला

यह सिर्फ़ शीर्ष पर बदलाव नहीं था, मतदाताओं का झुकाव सचमुच वापस पलटा था।

झुकाव के आँकड़े बताते हैं कि अकेले भाजपा के हाथ से 126 सीटें निकल गईं।

इनमें से ज़्यादातर सीटें कांग्रेस को मिलीं।

उसकी अपनी सीटें 56 से बढ़कर 174 हो गईं।

लगभग 58.9% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो राज्य में का नया रिकॉर्ड था।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला आमला, मध्य प्रदेश में हुआ, जहाँ सिर्फ़ 19 वोट रहा।

दूसरी ओर, पेटलावाद, मध्य प्रदेश में विजेता का जीत का अंतर 49.1% वोट रहा।

इस साल सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत सरिया, मध्य प्रदेश में रहा, 82.3%।

मतदाताओं के हिसाब से सबसे बड़ी सीट भोपाल दक्षिण, मध्य प्रदेश थी, जहाँ 2,97,734 पंजीकृत मतदाता थे।

पृष्ठभूमि

यह चुनाव एक अलग पार्टी की सरकार के पूरे कार्यकाल के बाद हुआ।

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RBI 2024-25

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