सीतापुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
सुखदेव राम (INC) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 35.2% वोट पाकर सीतापुर सीट जीती और अनूप साय (BJP) को 4,053 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 96 जरहागांव थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 96 मण्डला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुखदेव राम | 15,81335.2% | |
| 2 | अनूप साय | 11,76026.2% | |
| 3 | गोपाल राम निर्दलीय | निर्दलीय | 11,12424.8% |
| 4 | विजय वाम दल | वाम दल | 2,1504.8% |
| 5 | नायका राम | 9732.2% | |
| 6 | बाला साय निर्दलीय | निर्दलीय | 7931.8% |
| 7 | निर्मल निर्दलीय | निर्दलीय | 5851.3% |
| 8 | रामखेलावन निर्दलीय | निर्दलीय | 5451.2% |
| 9 | वकील राम निर्दलीय | निर्दलीय | 4431.0% |
| 10 | गोपाल बुधराम निर्दलीय | निर्दलीय | 3570.8% |
| 11 | निरंजन | 3320.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 86% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.88 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सीतापुर से कौन जीता, 1977–1998
INC ने यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार से छीन ली, जिसने इसे 1990 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1985 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत लगभग 1990 जितना ही रहा: 44.6%। इसके बाद 1998 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।