जबलपुर मध्यविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
ओमकार प्रसाद तिवारी (BJP) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 42.7% वोट पाकर जबलपुर मध्य सीट जीती और राममूर्ति मिश्रा (INC) को 4,698 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 196 छपारा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 196 शाहपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
8.8% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ओमकार प्रसाद तिवारी | 22,73442.7% | |
| 2 | राममूर्ति मिश्रा | 18,03633.9% | |
| 3 | आनन्द कुमार जनता दल | जनता दल | 8,27515.5% |
| 4 | शकील उल्फत | 3,3666.3% | |
| 5 | संतोष सेन | 4030.8% | |
| 6 | अतुल कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 960.2% |
| 7 | बी.पी.एस. नन्होरिया निर्दलीय | निर्दलीय | 890.2% |
| 8 | उमा शंकर निर्दलीय | निर्दलीय | 880.2% |
| 9 | सेठ साजन दास निर्दलीय | निर्दलीय | 860.2% |
| 10 | लक्ष्मण शंकर शेरे | 430.1% | |
| 11 | धन्या कुमार जैन निर्दलीय | निर्दलीय | 220.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.07 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जबलपुर मध्य से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1985 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 45.5% से घटकर 42.7% रह गया। मतदान प्रतिशत 1990 के 54.7% से बढ़कर 60.8% हो गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।