डबराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
जवाहर सिंह रावत (BSP) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 36.3% वोट पाकर डबरा सीट जीती और सीताराम दुबे (INC) को 5,308 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 20 सेंवढ़ा थी। 2003 में, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 20 सेवड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
6.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जवाहर सिंह रावत | 30,62736.3% | |
| 2 | सीताराम दुबे | 25,31930.0% | |
| 3 | नरोत्तम | 20,06223.8% | |
| 4 | गोपाल सिंह समाजवादी पार्टी | समाजवादी पार्टी | 7,3478.7% |
| 5 | रामचरण लाल जनता दल | जनता दल | 3140.4% |
| 6 | काशीराम रावत | 3070.4% | |
| 7 | रुक्मणी शर्मा | 1770.2% | |
| 8 | उमाचरण लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1120.1% |
| 9 | रामकृष्ण निर्दलीय | निर्दलीय | 930.1% |
| 10 | लालू सिंह परिहार KMGR | KMGR | 610.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.50 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डबरा से कौन जीता, 1977–2003
BSP ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1990 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह BSP की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1990 के 54.9% से बढ़कर 64.9% हो गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।