डबराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
नरोत्तम मिश्रा (BJP) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 28.3% वोट पाकर डबरा सीट जीती और श्री लाल बघेल एडवोकेट (BSP) को 3,737 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 20 सेंवढ़ा थी। 2003 में, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 20 सेवड़ा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। नरोत्तम मिश्रा 4.0% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नरोत्तम मिश्रा NDA | NDA | 26,67228.3% |
| 2 | श्री लाल बघेल एडवोकेट | 22,93524.4% | |
| 3 | नाथूराम गुप्ता (नेता जी) | 22,10923.5% | |
| 4 | रतन सिंह रावत | 18,19219.3% | |
| 5 | शिव मोहन सिंह राजपूत | 1,8692.0% | |
| 6 | रमेश चन्द्र | 6610.7% | |
| 7 | गोपाल सिंह ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 6170.7% |
| 8 | हरि बाबू ABHM | ABHM | 5980.6% |
| 9 | लक्खी ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 4180.4% |
| 10 | राम करण निर्दलीय | निर्दलीय | 1190.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 76% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.30 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डबरा से कौन जीता, 1977–2003
BJP ने यह सीट BSP से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था; BJP ने यहाँ पिछली बार 1990 में जीत दर्ज की थी। यह 1980 के बाद यहाँ का सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत लगभग 1993 जितना ही रहा: 65.2%। इसके बाद 2003 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।