बिंद्रानवागढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
ओंकार शाह (INC) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 31.7% वोट पाकर बिंद्रानवागढ़ सीट जीती और चरणसिंह माझी (BJP) को 1,391 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 142 भाठागांव थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 142 घोड़ाडोंगरी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
बिंद्रानवागढ़ का फ़ैसला सिर्फ़ 1.9% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 1,391 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ओंकार शाह | 22,92631.7% | |
| 2 | चरणसिंह माझी | 21,53529.8% | |
| 3 | महेश्वर सिंह कोमर्रा निर्दलीय | निर्दलीय | 10,42914.4% |
| 4 | भोजलाल नेताम वाम दल | वाम दल | 8,71512.0% |
| 5 | गोवर्धन सिंह माझी निर्दलीय | निर्दलीय | 4,9316.8% |
| 6 | प्रति शाह | 1,3341.8% | |
| 7 | उषा बाई ध्रुव निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2481.7% |
| 8 | रामेश्वर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1491.6% |
| 9 | विष्णुराम ध्रुव | 1210.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 76% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.36 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बिंद्रानवागढ़ से कौन जीता, 1977–1998
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1990 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1985 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1990 के 48.8% से बढ़कर 56.9% हो गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।