मासोदविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
रामजी महाजन (INC) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 43.4% वोट पाकर मासोद सीट जीती और ओमकार बरडे (BJP) को 2,294 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 229 कुरवाई थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 229 नीमच है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। रामजी महाजन 4.1% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रामजी महाजन | 24,42443.4% | |
| 2 | ओमकार बरडे | 22,13039.3% | |
| 3 | जयराम सूर्यवंशी वाम दल | वाम दल | 5,4449.7% |
| 4 | ज़ब्बोराव (बाबाराव ठाकरे) | 2,5474.5% | |
| 5 | नौखेलाल महाजन निर्दलीय | निर्दलीय | 4400.8% |
| 6 | बाहुराव धोटे जनता दल | जनता दल | 4060.7% |
| 7 | किसना निर्दलीय | निर्दलीय | 3240.6% |
| 8 | पुण्यभाऊ सूर्यवंशी BRP | BRP | 2680.5% |
| 9 | विट्ठल राव मगर्दे निर्दलीय | निर्दलीय | 2670.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, BJP और CPI को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.82 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2003 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2003 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मासोद से कौन जीता, 1977–1998
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1990 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1985 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1990 के 65.4% से घटकर 59.9% रह गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।