कोटाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
मथुरा प्रसाद दुबे (INC(I)) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 44.9% वोट पाकर कोटा सीट जीती और केदारनाथ (JNP(SC)) को 7,523 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 111 धरसींवा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 111 बहोरीबंद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मथुरा प्रसाद दुबे 22.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मथुरा प्रसाद दुबे | 14,98844.9% | |
| 2 | केदारनाथ JNP(SC) | JNP(SC) | 7,46522.4% |
| 3 | नन्द किशोर पाण्डेय | 4,92514.8% | |
| 4 | लालजी निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3747.1% |
| 5 | वृजभान सिंह वाम दल | वाम दल | 1,6404.9% |
| 6 | जमना प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 7892.4% |
| 7 | चुंकी निर्दलीय | निर्दलीय | 6131.8% |
| 8 | मंगल प्रसाद दुबे JNP(SR) | JNP(SR) | 6071.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 82% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.55 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कोटा से कौन जीता, 1977–1998
INC(I) ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत लगभग 1977 जितना ही रहा: 47.5%। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।