मुलताईविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
मनीराम बरंगे (निर्दलीय) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 30.5% वोट पाकर मुलताई सीट जीती और शिवचरण सूरजमल अग्रवाल (BJP) को 1,958 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 228 बैरसिया थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 228 मंदसौर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मनीराम बरंगे निर्दलीय | निर्दलीय | 10,83530.5% |
| 2 | शिवचरण सूरजमल अग्रवाल | 8,87725.0% | |
| 3 | सन देरलाल ब्रजलाल जायसवाल | 8,33023.4% | |
| 4 | राधाकृष्ण गर्ग वकील निर्दलीय | निर्दलीय | 6,59318.6% |
| 5 | अजाबराव मालवीय RPK | RPK | 6511.8% |
| 6 | ठाकुर रामेश्वर सिंह रघुबंशी निर्दलीय | निर्दलीय | 2510.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.08 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मुलताई से कौन जीता, 1977–1998
1977 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। मतदान प्रतिशत 1977 के 49.7% से बढ़कर 54.1% हो गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।