सरियाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
डॉ. शक्रजीत नाईक (BJP) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 47.8% वोट पाकर सरिया सीट जीती और डॉ. जवाहर नायक (INC) को 18,567 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 105 सक्ती थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 105 जबलपुर पूर्व है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — डॉ. शक्रजीत नाईक 20.8% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. शक्रजीत नाईक NDA | NDA | 42,61447.8% |
| 2 | डॉ. जवाहर नायक | 24,04727.0% | |
| 3 | डॉ. परिवेश मिश्रा निर्दलीय | निर्दलीय | 11,72713.2% |
| 4 | सुभाष साहू | 5,3546.0% | |
| 5 | मधुसूदन | 2,4272.7% | |
| 6 | हरिबंधु बिशाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6181.8% |
| 7 | डॉ. सीतादेवी वैष्णव निर्दलीय | निर्दलीय | 9511.1% |
| 8 | मनबोध निर्दलीय | निर्दलीय | 2480.3% |
| 9 | संतोष मराठा निर्दलीय | निर्दलीय | 1640.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 88% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.09 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सरिया से कौन जीता, 1977–1998
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1993 में जीता था; BJP ने यहाँ पिछली बार 1990 में जीत दर्ज की थी। यह 1977 के बाद यहाँ का सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1993 के 82.3% से घटकर 79.8% रह गया।