दमुआविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
हरिशंकर उइके (INC) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 54.2% वोट पाकर दमुआ सीट जीती और अनुसुइया उइके (BJP) को 6,600 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 217 हरदा थी। छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, 2003 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2003 से सीट नंबर 217 पेटलावाद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हरिशंकर उइके | 31,80654.2% | |
| 2 | अनुसुइया उइके NDA | NDA | 25,20643.0% |
| 3 | जंगल सिंह उइकी | 4570.8% | |
| 4 | जौहरी लाल उनती | 3320.6% | |
| 5 | मनीराम अहके निर्दलीय | निर्दलीय | 2990.5% |
| 6 | प्रविण कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 2140.4% |
| 7 | गोकल प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 1460.3% |
| 8 | परसराम दुर्वे निर्दलीय | निर्दलीय | 790.1% |
| 9 | देवकी बाई कुमरे निर्दलीय | निर्दलीय | 540.1% |
| 10 | राजेन्द्र कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 500.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और BJP को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.09 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दमुआ से कौन जीता, 1977–1998
INC ने 1993 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 52.9% से बढ़कर 54.2% हो गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1993 के 39.2% से बढ़कर 44.3% हो गया।