दमोहविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1998
जयंत कुमार मलैया (BJP) ने 1998 के विधान सभा चुनाव में 50.0% वोट पाकर दमोह सीट जीती और अजय भैया टण्डन (INC) को 5,406 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 53 मनगवाँ थी। 2003 में, छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद, जब सीटों के नंबर बदले गए, तब भी इसका नंबर वही रहा। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 53 मलहरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | जयंत कुमार मलैया NDA | NDA | 45,89150.0% |
| 2 | अजय भैया टण्डन | 40,48544.1% | |
| 3 | अमरजीत सरदार (टी.वी. वाला) | 3,6724.0% | |
| 4 | लखन लाल तिवारी | 8580.9% | |
| 5 | बाबूलाल निर्दलीय | निर्दलीय | 2790.3% |
| 6 | रमेश कुमार रजक | 2280.3% | |
| 7 | दयावती | 1730.2% | |
| 8 | चन्द्रभान राव निर्दलीय | निर्दलीय | 810.1% |
| 9 | हरिराम निर्दलीय | निर्दलीय | 710.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
BJP और INC को 94% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.24 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दमोह से कौन जीता, 1977–2003
BJP ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1990 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत लगभग पहले जितना ही रहा: 50.0%। मतदान प्रतिशत 1993 के 63.7% से घटकर 59.1% रह गया। इसके बाद 2003 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।