बिहार 1985 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 196 सीटें (60.5%)LKD: 46 सीटें (14.2%)IND: 29 सीटें (9.0%)BJP: 16 सीटें (4.9%)JNP: 13 सीटें (4.0%)CPI: 12 सीटें (3.7%)JMM: 9 सीटें (2.8%)CPM: 1 सीट (0.3%)अन्य (2 पार्टियाँ): 2 सीटें — ICS 1, SUC 1बहुमत के लिए 163324सरकार बनाने के लिए 163
  • INC19660.5%
  • LKD4614.2%
  • निर्दलीय299.0%
  • BJP164.9%
  • JNP134.0%
  • CPI123.7%
  • JMM92.8%
  • CPM10.3%
  • अन्य20.6%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस को बड़ा बहुमत

क्या हुआ

बिहार के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़ा बहुमत हासिल किया।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 324 में से 196 सीटें जीतीं — काफ़ी गुंजाइश के साथ एक भारी जीत।

इससे उसके पास बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 33 सीटें ज़्यादा थीं।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी लोक दल सिर्फ़ 46 सीटों के साथ पीछे रही।

क्या बदला

इस चुनाव में एक नई विपक्षी पार्टी पहली बार बिहार विधान सभा में पहुँची और दूसरे स्थान पर रही।

लोक दल 46 सीटों के साथ सदन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी।

थोड़ा घटकर 55.4% रहा, जो पिछले चुनाव से मामूली कम था।

अहम आँकड़े

इस चुनाव परिणाम के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: टुंडी, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 24 वोटों से हुआ।

दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा शिकारपुर, बिहार में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 72.2% वोट आगे रहा। यह अंतर वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।

सीटों के इतने बड़े बहुमत के बावजूद कांग्रेस के सिर्फ़ 39.3% था।

इस चुनाव का सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत अतरी, बिहार में दर्ज हुआ, जहाँ 84.9% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

पृष्ठभूमि

पिछले दशक की राजनीतिक टूट के बाद बिहार में दलों की तस्वीर अब भी बदल रही थी, और कई नए और नए नाम वाले दल सीटों के लिए मैदान में थे।

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