बिहार 1977 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
JNP: 214 सीटें (66.0%)INC: 57 सीटें (17.6%)IND: 24 सीटें (7.4%)CPI: 21 सीटें (6.5%)CPM: 4 सीटें (1.2%)JKD: 2 सीटें (0.6%)JKP: 1 सीट (0.3%)SSD: 1 सीट (0.3%)बहुमत के लिए 163324सरकार बनाने के लिए 163
  • JNP21466.0%
  • INC5717.6%
  • निर्दलीय247.4%
  • CPI216.5%
  • CPM41.2%
  • JKD20.6%
  • JKP10.3%
  • SSD10.3%
चुनाव की कहानी

इमरजेंसी के बाद बिहार का फ़ैसला

क्या हुआ

बिहार ने सत्ता एक बिल्कुल नई विपक्षी पार्टी को सौंपी और राज्य सरकार पर कांग्रेस की लंबी पकड़ ख़त्म हो गई।

जनता पार्टी ने 324 में से 214 सीटें जीतीं — एक भारी जीत, जिससे उसे आराम से बहुमत मिल गया।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस की सीटें ढहकर सिर्फ़ 57 रह गईं।

क्या बदला

यह चुनाव जीतने वाली पार्टी बिहार के पिछले चुनाव के समय अस्तित्व में भी नहीं थी।

वह 0 सीटों से 214 सीटों पर पहुँची — ऐसी शुरुआत जिसने उसे रातोंरात राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया।

लगभग 49.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले चुनाव से थोड़ा कम था।

अहम आँकड़े

इस परिणाम के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।

इतने बड़े बहुमत के बावजूद जनता पार्टी के सिर्फ़ 42.7% था।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: मांडर, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 31 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम था।

इसके उलट, महुआ, बिहार में उस रात का सबसे बड़ा अंतर दिखा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 70.9% वोट आगे रहे।

उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा पंजीकृत मतदाता पटना पश्चिम, बिहार में थे, कुल 1,60,817।

पृष्ठभूमि

यह बिहार के पहले के परिणामों से बिल्कुल अलग था: एक पूरी तरह नई पार्टी ने पहली बार राज्य सरकार की कमान सँभाली।

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RBI 2024-25

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