बिहार 1967 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 128 सीटें (40.3%)SSP: 68 सीटें (21.4%)IND: 33 सीटें (10.4%)BJS: 26 सीटें (8.2%)CPI: 24 सीटें (7.5%)PSP: 18 सीटें (5.7%)JKD: 13 सीटें (4.1%)CPM: 4 सीटें (1.3%)अन्य (2 पार्टियाँ): 4 सीटें — SWA 3, RPI 1बहुमत के लिए 160318सरकार बनाने के लिए 160
  • INC12840.3%
  • SSP6821.4%
  • निर्दलीय3310.4%
  • BJS268.2%
  • CPI247.5%
  • PSP185.7%
  • JKD134.1%
  • CPM41.3%
  • अन्य41.3%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस बहुमत से पीछे

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर जीती, लेकिन इस बार इतनी सीटें नहीं मिलीं कि अकेले सरकार चला सके।

कांग्रेस ने 318 सीटों में से 128 सीटें जीतीं।

इससे वह बहुमत के लिए ज़रूरी 160 सीटों से पीछे रह गई, यानी सदन।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने 68 सीटें जीतीं।

क्या बदला

इस चुनाव में कांग्रेस का समर्थन तेज़ी से गिरा और विधान सभा पहले से कहीं ज़्यादा बिखरी हुई बनी।

उसकी अपनी सीटें 185 से घटकर 128 रह गईं।

उस साल 33 निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सीटें जीतीं।

अहम आँकड़े

उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: दाउदनगर, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 23 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम था।

दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर मधुबन, बिहार में रहा, जहाँ विजेता और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 60.3% वोटों का फ़ासला था। यह अंतर वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।

सबसे ज़्यादा सोनबरसा, बिहार में रहा, जहाँ 72.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला पटमदा, बिहार में था, जहाँ एक सीट के लिए 15 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

उस साल कोई भी पार्टी अकेले बहुमत के आसपास भी नहीं पहुँची, और पूरे राज्य में मुक़ाबला पूरी तरह खुला रहा।

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RBI 2024-25

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