बिहार 1957 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 210 सीटें (66.0%)JHP: 31 सीटें (9.7%)PSP: 31 सीटें (9.7%)CNPSPJP: 23 सीटें (7.2%)IND: 16 सीटें (5.0%)CPI: 7 सीटें (2.2%)बहुमत के लिए 160318सरकार बनाने के लिए 160
  • INC21066.0%
  • JHP319.7%
  • PSP319.7%
  • CNPSPJP237.2%
  • निर्दलीय165.0%
  • CPI72.2%
चुनाव की कहानी

फिर भारी जीत, पर पहले से कम सीटें

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर जीती और बाक़ी सबसे आराम से आगे रही।

कांग्रेस ने 318 में से 210 सीटें जीतीं — एक और भारी जीत के लिए काफ़ी।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने 31 सीटें जीतीं।

फिर भी उसकी अपनी सीटें पिछले चुनाव की 239 से कम हो गईं।

क्या बदला

यह चुनाव देश भर में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ नए सिरे से तय होने के बाद हुआ, इस प्रक्रिया को कहते हैं।

विधान सभा में सीटों की संख्या 330 से बदलकर 318 हो गई।

फिर भी, कांग्रेस अब राज्य में लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।

अहम आँकड़े

उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: अस्थावां, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 18 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम था।

दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर चनपटिया, बिहार में रहा, जहाँ विजेता और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 67.6% वोटों का फ़ासला था। यह अंतर वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।

सबसे ज़्यादा सुरसंड, बिहार में रहा, जहाँ 67.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से निरसा, बिहार राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 1,48,361 नाम थे।

पृष्ठभूमि

कांग्रेस ने राज्य पर अपनी पकड़ बनाए रखी और अब भी बिखरे हुए विपक्ष से बहुत आगे रहकर फिर सरकार चलाई।

इससे वही पार्टी सत्ता में बनी रही, सरकार नहीं बदली।

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