बिहार ने अपनी पहली विधान सभा चुनी
क्या हुआ
बिहार के पहले विधान सभा चुनाव में एक पार्टी की एकतरफ़ा जीत हुई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 330 सीटों में से 239 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 73 सीटें ज़्यादा थीं — इतनी कि इसे भारी जीत कहा जा सके।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी झारखण्ड पार्टी सिर्फ़ 32 सीटें जीत सकी।
क्या बदला
यह बिहार की अपनी विधान सभा के नक्शे पर हुआ पहला चुनाव भी था।
उस पहले चुनाव की कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, जहाँ एक ही मुक़ाबले से नई विधान सभा के लिए एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
276 निर्वाचन क्षेत्रों में से 54 इसी तरह काम करते थे।
कुल मिलाकर 10 अलग-अलग दलों ने नए सदन में कम से कम एक सीट जीती।
अहम आँकड़े
उस पहली मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: सुरसंड, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 2 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर इस्लामपुर, बिहार में रहा, जहाँ विजेता और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 80.4% वोटों का फ़ासला था। यह अंतर वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा मतदान एकंगरसराय, बिहार में हुआ, जहाँ 75.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला नवादा सह हिसुआ, बिहार में था, जहाँ मतपत्र पर 18 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यह बिहार की अपनी विधान सभा का पहला चुनाव था, इसलिए राज्य में कहीं भी तुलना के लिए कोई पिछला परिणाम नहीं था।