कतरासविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
मनोरमा सिन्हा (निर्दलीय) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 39.4% वोट पाकर कतरास सीट जीती और सच्चिदानंद त्रिगुणायत (निर्दलीय) को 5,798 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 256 गुमला है।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मनोरमा सिन्हा 27.1% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मनोरमा सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 8,42339.4% |
| 2 | सच्चिदानंद त्रिगुणायत निर्दलीय | निर्दलीय | 2,62512.3% |
| 3 | कनाही लाल पाल | 2,41111.3% | |
| 4 | रामचंद्र प्रसाद शर्मा | 2,38511.1% | |
| 5 | गोपाल चंदा बनिक SP | SP | 2,30910.8% |
| 6 | शंकर दयाल सिंह KMPP | KMPP | 1,6447.7% |
| 7 | नागेन्द्र नाथ ओझा निर्दलीय | निर्दलीय | 8684.1% |
| 8 | लखी लोहार | 4081.9% | |
| 9 | बी.के. सरकार निर्दलीय | निर्दलीय | 3281.5% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 63% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.65 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1977 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1977 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।