नए नाम से कांग्रेस की वापसी
क्या हुआ
कांग्रेस से जुड़ी एक पार्टी बिहार की सत्ता में लौटी; पिछले चुनाव के बाद से वह सरकार से बाहर थी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने कुल 324 सीटों में से 169 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 6 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी जनता पार्टी (सेक्युलर) - चौ. चरण सिंह 42 सीटों के साथ बहुत पीछे रही।
क्या बदला
बिहार का पिछला चुनाव जीतने वाली पार्टी की सीटें ढह गईं, और उसकी जगह कांग्रेस से जुड़ी एक पार्टी सरकार में आई।
किसी भी और जोड़ी से ज़्यादा सीटें जनता पार्टी से इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) के पास गईं — इस तरह 111 सीटें बदलीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी बढ़कर 56.5% हो गया, जो तब तक बिहार में दर्ज सबसे ऊँचा स्तर था।
अहम आँकड़े
इस मतगणना के कुछ आँकड़े ख़ास ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: जामताड़ा, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 24 वोटों से हुआ।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) बरबीघा, बिहार में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 65.3% वोट आगे रहा। यह अंतर वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार मुजफ्फरपुर, बिहार में उतरे, बैलट पर 24 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव बिहार के पिछले चुनाव के ठीक बाद हुआ, जब एक दूसरी पार्टी ने पहली बार राज्य सरकार की कमान सँभाली थी।