कांग्रेस ने फिर बहुमत हासिल किया
क्या हुआ
पिछले कुछ चुनावों में बहुमत से पीछे रहने के बाद इस बार कांग्रेस ने फिर साफ़ बहुमत हासिल किया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 318 सीटों में से 167 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 7 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया सिर्फ़ 35 सीटें जीत सकी।
क्या बदला
फिर भी बड़ी संख्या में सीटें फिर एक पार्टी से दूसरी के हाथ गईं, और कुल तस्वीर अब भी स्थिर नहीं थी।
318 निर्वाचन क्षेत्रों में से 223 ने पिछले चुनाव से अलग पार्टी को चुना।
सबसे बड़ा बदलाव फिर संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से कांग्रेस की ओर हुआ, जिसने इनमें से 28 सीटें अपने नाम कीं।
अहम आँकड़े
उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: छतरपुर, बिहार का फ़ैसला सिर्फ़ 163 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर पारू, बिहार में रहा, जहाँ विजेता और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 81.6% वोटों का फ़ासला था। यह अंतर वोटों की गिनती में नहीं, कुल वोटों के हिस्से के रूप में मापा गया है।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मधेपुर, बिहार में रहा, जहाँ 84.0% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला अस्थावां, बिहार में था, जहाँ एक सीट के लिए 13 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह कई बँटी हुई विधान सभाओं के दौर के बाद हुआ, जब कोई भी पार्टी अकेले सरकार नहीं चला पा रही थी।
इसके साथ कांग्रेस की जीत का सिलसिला भी आगे बढ़ा: राज्य में लगातार 6 जीत।