मझगांवविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
देबेंद्र नाथ चाम्पिया (निर्दलीय) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 31.6% वोट पाकर मझगांव सीट जीती और विद्या सागर पिंगुवा (INC) को 1,598 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में भी सीट नंबर 290 का नाम मझगांव था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 290 जुगसलाई है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | देबेंद्र नाथ चाम्पिया निर्दलीय | निर्दलीय | 6,70331.6% |
| 2 | विद्या सागर पिंगुवा कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 5,10524.1% |
| 3 | कोलाई बिरुवा JKP | JKP | 3,67217.3% |
| 4 | गोवर्धन नायेक | 2,51111.8% | |
| 5 | शुवास चन्द्र हेसा निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6057.6% |
| 6 | वीर सिंह सिरकत निर्दलीय | निर्दलीय | 5602.6% |
| 7 | सनातन हेम्ब्रम निर्दलीय | निर्दलीय | 5492.6% |
| 8 | सनातन समद JKD | JKD | 4942.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 73% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.77 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1977 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1977 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मझगांव से कौन जीता, 1967–1972
1969 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। मतदान प्रतिशत 1969 के 30.8% से घटकर 22.5% रह गया।