किशनगंजविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
रफीक आलम (INC) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 60.2% वोट पाकर किशनगंज सीट जीती और लक्ष्मी कान्त त्रिपाठी (BJS) को 21,659 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 129 अमौर थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 129 फारबिसगंज है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — रफीक आलम 48.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रफीक आलम कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 26,92160.2% |
| 2 | लक्ष्मी कान्त त्रिपाठी महागठबंधन | महागठबंधन | 5,26211.8% |
| 3 | ज़ाकिरअली इराकी महागठबंधन | महागठबंधन | 4,1129.2% |
| 4 | सुशीला कपूर | 3,6698.2% | |
| 5 | अब्दुस शकूर निर्दलीय | निर्दलीय | 2,7586.2% |
| 6 | अतहर हसन | 1,8204.1% | |
| 7 | अब्दुल सलाम निर्दलीय | निर्दलीय | 2030.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, BJS और SWA को 81% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.52 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
किशनगंज से कौन जीता, 1967–1972
INC ने 1969 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 48.1% से बढ़कर 60.2% हो गया। मतदान प्रतिशत लगभग 1969 जितना ही रहा: 46.9%।