बरौनीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
चन्द्र शेखर सिंह (CPI) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 48.5% वोट पाकर बरौनी सीट जीती और रमणेश्वर नाथ दत्त (NCO) को 8,539 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 189 तेघड़ा थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 189 सिकन्दरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
12.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | चन्द्र शेखर सिंह वाम दल | वाम दल | 34,51748.5% |
| 2 | रमणेश्वर नाथ दत्त | 25,97836.5% | |
| 3 | राम पदारथ सिंह वाम दल | वाम दल | 3,8305.4% |
| 4 | सुधीर कुमार सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3593.3% |
| 5 | भागवत सिंह | 1,7002.4% | |
| 6 | बिजय शंकर तांती निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5932.2% |
| 7 | ब्रह्म देव प्रसाद दास महागठबंधन | महागठबंधन | 1,2691.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPI, NCO और CPM को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.68 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बरौनी से कौन जीता, 1967–1972
1967 से यहाँ हर चुनाव CPI ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत लगभग पहले जितना ही रहा: 48.5%। मतदान प्रतिशत 1969 के 63.4% से घटकर 58.7% रह गया।