कुर्थाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
सकदेव प्रसाद यादव (JNP(SC)) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 34.8% वोट पाकर कुर्था सीट जीती और नागमणि (SSD) को 5,761 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 243 औरंगाबाद थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 243 हिसुआ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सकदेव प्रसाद यादव JNP(SC) | JNP(SC) | 34,95334.8% |
| 2 | नागमणि SSD | SSD | 29,19229.0% |
| 3 | त्रिबानी शर्मा सुधाकर वाम दल | वाम दल | 18,08718.0% |
| 4 | राम पायरा सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 8,7158.7% |
| 5 | श्यामदेव प्रसाद यादव | 5,0695.0% | |
| 6 | एस.एम. जहीरुद्दीन JNP(JP) | JNP(JP) | 1,7721.8% |
| 7 | मुजफ्फर हुसैन JNP(SR) | JNP(SR) | 1,5881.6% |
| 8 | बृंद चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 7210.7% |
| 9 | मदन मोहन भगत निर्दलीय | निर्दलीय | 1740.2% |
| 10 | कृति नारायण सिंह | 1610.2% | |
| 11 | हरि लाल प्रसाद सिन्हा | 1440.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 82% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.03 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कुर्था से कौन जीता, 1977–2000
JNP(SC) ने यह सीट SSD से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 62.7% से बढ़कर 72.1% हो गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।