चतराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1967
के. पी. सिंह (निर्दलीय) ने 1967 के विधान सभा चुनाव में 29.1% वोट पाकर चतरा सीट जीती और एस. देवी (INC) को 1,411 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में भी सीट नंबर 269 का नाम चतरा था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 269 हजारीबाग है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | के. पी. सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 8,19029.1% |
| 2 | एस. देवी | 6,77924.1% | |
| 3 | जे. पी. जायसवाल Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 5,80620.6% |
| 4 | के. बी. सहाय निर्दलीय | निर्दलीय | 4,22315.0% |
| 5 | सी. एस. आजाद | 1,5375.5% | |
| 6 | बी. साहू वाम दल | वाम दल | 1,1444.1% |
| 7 | एम. सिंह स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 4741.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 74% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.71 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1977 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1977 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
चतरा से कौन जीता, 1967–1972
इसके बाद 1969 के चुनाव में यह सीट JAP ने जीती।