हिसुआविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
बाबू लाल सिंह (JNP) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 29.6% वोट पाकर हिसुआ सीट जीती और आदित्य सिंह (निर्दलीय) को 243 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 261 जमुआ थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से कोई सीट नंबर 261 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
हिसुआ का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 243 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बाबू लाल सिंह जनता | जनता | 17,54529.6% |
| 2 | आदित्य सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 17,30229.1% |
| 3 | लाल नारायण सिंह वाम दल | वाम दल | 12,83421.6% |
| 4 | नरेन्द्र कुमार सिंह | 7,95813.4% | |
| 5 | जगरूप राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5842.7% |
| 6 | उपेंदर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,4392.4% |
| 7 | राम बृक्ष सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3600.6% |
| 8 | भागवत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3470.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.20 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हिसुआ से कौन जीता, 1977–2000
इसके बाद 1980 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।