हिसुआविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
आदित्य सिंह (निर्दलीय) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 40.4% वोट पाकर हिसुआ सीट जीती और लाल नारायण सिंह (CPI) को 7,750 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 261 जमुआ थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से कोई सीट नंबर 261 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
10.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | आदित्य सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 29,69140.4% |
| 2 | लाल नारायण सिंह वाम दल | वाम दल | 21,94129.8% |
| 3 | सुबोध कुमार | 15,93521.7% | |
| 4 | गिरिजेश प्रसाद सिंह | 2,4913.4% | |
| 5 | जनार्दन प्रसाद Lok Dal | Lok Dal | 2,0602.8% |
| 6 | महफूज आलम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0151.4% |
| 7 | राज कुमार सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3020.4% |
| 8 | बृजनंदन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 910.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.32 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हिसुआ से कौन जीता, 1977–2000
1980 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। मतदान प्रतिशत 1980 के 43.9% से बढ़कर 52.5% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।