मनेरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1977
सूर्यदेव सिंह (JNP) ने 1977 के विधान सभा चुनाव में 51.9% वोट पाकर मनेर सीट जीती और राम नगीना सिंह (INC) को 7,296 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 210 पालीगंज थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 210 रामगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
11.4% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सूर्यदेव सिंह जनता | जनता | 33,27951.9% |
| 2 | राम नगीना सिंह | 25,98340.5% | |
| 3 | शिवधर प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,5624.0% |
| 4 | विश्वनाथ मिश्रा निर्दलीय | निर्दलीय | 5130.8% |
| 5 | अम्बिका सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4080.6% |
| 6 | त्रिपुरारी शरण सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2930.5% |
| 7 | रबीन्द्र कुमार सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2910.5% |
| 8 | भूषण पाठक निर्दलीय | निर्दलीय | 2310.4% |
| 9 | राम नाथ रजक निर्दलीय | निर्दलीय | 2160.3% |
| 10 | गणपत राय निर्दलीय | निर्दलीय | 1780.3% |
| 11 | ज्वाला प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1390.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JNP, INC और एक निर्दलीय को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.30 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मनेर से कौन जीता, 1977–2000
इसके बाद 1980 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।