जमुआविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
बलदेव हजरा (CPI) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 60.8% वोट पाकर जमुआ सीट जीती और तनेश्वर आजाद (INC) को 18,492 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 273 जरीडीह थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से कोई सीट नंबर 273 नहीं है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — बलदेव हजरा 30.4% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बलदेव हजरा वाम दल | वाम दल | 37,02760.8% |
| 2 | तनेश्वर आजाद | 18,53530.4% | |
| 3 | सुकर रविदास | 4,0216.6% | |
| 4 | ईश्वर कान्त हजरा निर्दलीय | निर्दलीय | 5060.8% |
| 5 | जगदीश बैठा निर्दलीय | निर्दलीय | 3410.6% |
| 6 | भूपाल चौधरी निर्दलीय | निर्दलीय | 3180.5% |
| 7 | जागेश्वर लाल पासवान निर्दलीय | निर्दलीय | 1620.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPI और INC को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.14 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जमुआ से कौन जीता, 1977–2000
CPI ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह CPI की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 40.3% से बढ़कर 47.5% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में भी CPI ने यह सीट अपने पास रखी।