पटना मध्यविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
अकील हैदर (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 47.5% वोट पाकर पटना मध्य सीट जीती और शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव (BJP) को 19,601 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 207 दानापुर थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 207 काराकाट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — अकील हैदर 28.2% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
29 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अकील हैदर | 33,02647.5% | |
| 2 | शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव | 13,42519.3% | |
| 3 | मुन्ना मेहता लोक दल | लोक दल | 7,80111.2% |
| 4 | सुरेन्द्र शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 5,0117.2% |
| 5 | अनिल कुमार शर्मा जनता | जनता | 3,8355.5% |
| 6 | भीम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7662.5% |
| 7 | पन्ना लाल गुप्ता निर्दलीय | निर्दलीय | 9871.4% |
| 8 | अतीश कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 6530.9% |
| 9 | राम किशोर ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 5570.8% |
| 10 | सियावर शरण सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 4750.7% |
| 11 | मो. यन्नुस निर्दलीय | निर्दलीय | 3410.5% |
| 12 | द्वारिका प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 3410.5% |
| 13 | डी. एस. पाण्डेय निर्दलीय | निर्दलीय | 3070.4% |
| 14 | सरदार देव नन्दन निर्दलीय | निर्दलीय | 1610.2% |
| 15 | सुबोध कुमार साहू निर्दलीय | निर्दलीय | 1560.2% |
| 16 | नईम अख्तर निर्दलीय | निर्दलीय | 1540.2% |
| 17 | बाही केदार नाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 1040.1% |
| 18 | प्रेम चन्द्र सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 870.1% |
| 19 | शम्भू कुमार सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 750.1% |
| 20 | फूल कुमार सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 540.1% |
| 21 | वीरेन्द्र कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 540.1% |
| 22 | विनय राऊत निर्दलीय | निर्दलीय | 530.1% |
| 23 | राम कृष्ण गिरी निर्दलीय | निर्दलीय | 390.1% |
| 24 | सत्येन्द्र कुमार सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 330.1% |
| 25 | एडवल अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 220.0% |
| 26 | राम ईश्वर ठाकुर निर्दलीय | निर्दलीय | 210.0% |
| 27 | असगर इमाम निर्दलीय | निर्दलीय | 210.0% |
| 28 | चन्द्र प्रकाश सिन्हा निर्दलीय | निर्दलीय | 150.0% |
| 29 | गोपाल महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 100.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.52 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पटना मध्य से कौन जीता, 1977–2000
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह INC की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 44.0% से घटकर 41.1% रह गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।