पटना मध्यविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1990
सुशील कुमार मोदी (BJP) ने 1990 के विधान सभा चुनाव में 30.1% वोट पाकर पटना मध्य सीट जीती और अकील हैदर (INC) को 3,113 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 207 दानापुर थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 207 काराकाट है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। सुशील कुमार मोदी 3.0% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
47 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुशील कुमार मोदी | 31,02130.1% | |
| 2 | अकील हैदर | 27,90827.1% | |
| 3 | राजीव रंजन प्रसाद राष्ट्रीय मोर्चा | राष्ट्रीय मोर्चा | 9,4359.1% |
| 4 | जाबिर हुसैन निर्दलीय | निर्दलीय | 9,2318.9% |
| 5 | मोहन प्रसाद वाम दल | वाम दल | 7,4517.2% |
| 6 | अंजनी कुमार सिन्हा JNP(JP) | JNP(JP) | 6,4046.2% |
| 7 | जनार्धन प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,3432.3% |
| 8 | राम लखन राम | 2,1002.0% | |
| 9 | दुर्गा प्रसाद यादव निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0452.0% |
| 10 | पन्ना लाल गुप्ता निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3331.3% |
| 11 | ओम प्रकाश अकेला निर्दलीय | निर्दलीय | 5160.5% |
| 12 | सत्येन्द्र कुमार सिन्हा ABJS | ABJS | 4730.5% |
| 13 | उमा शंकर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3620.3% |
| 14 | दामो खान DMM | DMM | 2470.2% |
| 15 | सुरेश कुमार शर्मा | 1930.2% | |
| 16 | वीरेन्द्र प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1680.2% |
| 17 | नन्द लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1640.2% |
| 18 | मोन्नबार नजमी निर्दलीय | निर्दलीय | 1620.2% |
| 19 | विष्णुदयाल यादव BBP | BBP | 1420.1% |
| 20 | संतोष नन्दन निर्दलीय | निर्दलीय | 1390.1% |
| 21 | रामानंद सिंह MCOR | MCOR | 1350.1% |
| 22 | सीता राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1230.1% |
| 23 | वीरेन्द्र कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 880.1% |
| 24 | राम निरंजन सहाय निर्दलीय | निर्दलीय | 860.1% |
| 25 | कृष्ण मुरारी निर्दलीय | निर्दलीय | 760.1% |
| 26 | ललन प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 750.1% |
| 27 | धर्म देव साह निर्दलीय | निर्दलीय | 720.1% |
| 28 | वासुदेव सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 690.1% |
| 29 | वीरेन्द्र प्रसाद सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 660.1% |
| 30 | चतुर्भुज सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 540.1% |
| 31 | नफीसा अली | 540.1% | |
| 32 | नन्द किशोर महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 490.1% |
| 33 | नरेश चन्द्र शुक्ला निर्दलीय | निर्दलीय | 490.1% |
| 34 | रामेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव निर्दलीय | निर्दलीय | 380.0% |
| 35 | भरता भूषण उर्फ़ मुन्ना निर्दलीय | निर्दलीय | 360.0% |
| 36 | युगल किशोर शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 350.0% |
| 37 | मोहम्मद युनुस मोहम निर्दलीय | निर्दलीय | 340.0% |
| 38 | लाला महतो निर्दलीय | निर्दलीय | 330.0% |
| 39 | स्रंडर प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 290.0% |
| 40 | पवन खंडेवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 260.0% |
| 41 | विश्व मोहन चौधरी संत निर्दलीय | निर्दलीय | 250.0% |
| 42 | अमर कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 190.0% |
| 43 | केदार पाण्डेय निर्दलीय | निर्दलीय | 180.0% |
| 44 | गोवर्धन लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 170.0% |
| 45 | राम दत्त ओझा निर्दलीय | निर्दलीय | 170.0% |
| 46 | मोहम्मद अलीमुद्दीन निर्दलीय | निर्दलीय | 140.0% |
| 47 | मतिरुल हक निर्दलीय | निर्दलीय | 120.0% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 66% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.25 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पटना मध्य से कौन जीता, 1977–2000
BJP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1985 में जीता था; BJP ने यहाँ पिछली बार 1980 में जीत दर्ज की थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1985 के 41.1% से बढ़कर 50.3% हो गया। इसके बाद 1995 के चुनाव में भी BJP ने यह सीट अपने पास रखी।