जामाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
शिबू सोरेन (JMM) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 66.2% वोट पाकर जामा सीट जीती और प्रोमे मुर्मू (INC) को 18,344 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 161 गोपालपुर थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 161 तारापुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — शिबू सोरेन 34.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शिबू सोरेन | 34,82866.2% | |
| 2 | प्रोमे मुर्मू | 16,48431.3% | |
| 3 | मंगोल सोरेन निर्दलीय | निर्दलीय | 5661.1% |
| 4 | मोहरिल मुर्मू निर्दलीय | निर्दलीय | 4410.8% |
| 5 | अरुणा हाँसदाह निर्दलीय | निर्दलीय | 2900.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
JMM और INC को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.86 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
जामा से कौन जीता, 1977–2000
JMM ने 1980 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 55.9% से बढ़कर 66.2% हो गया। मतदान प्रतिशत 1980 के 35.0% से बढ़कर 47.9% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में भी JMM ने यह सीट अपने पास रखी।