पाकुड़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
हाजी मुहम्मद ऐनुल हक (INC) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 44.3% वोट पाकर पाकुड़ सीट जीती और अब्दुल हाकिम (CPM) को 12,249 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 151 जरमुंडी थी। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद, 2005 के चुनाव के लिए सीटों के नंबर बदले गए। 2005 से सीट नंबर 151 गोपालपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — हाजी मुहम्मद ऐनुल हक 17.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हाजी मुहम्मद ऐनुल हक | 30,27844.3% | |
| 2 | अब्दुल हाकिम वाम दल | वाम दल | 18,02926.4% |
| 3 | सुभाष चन्द्र सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 13,06819.1% |
| 4 | श्याम लाल गौड़ निर्दलीय | निर्दलीय | 3,4025.0% |
| 5 | बेनी प्रसाद गुप्ता | 2,7794.1% | |
| 6 | मनोहर लाल चौ जनता | जनता | 7711.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.26 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2010 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2010 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पाकुड़ से कौन जीता, 1977–2000
INC ने यह सीट CPM से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1977 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1980 के 54.0% से बढ़कर 57.5% हो गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।