पश्चिम बंगाल 1971 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
CPM: 113 सीटें (40.5%)INC: 105 सीटें (37.6%)CPI: 13 सीटें (4.7%)IND: 12 सीटें (4.3%)SUC: 7 सीटें (2.5%)BAC: 5 सीटें (1.8%)FBL: 3 सीटें (1.1%)PSP: 3 सीटें (1.1%)अन्य (9 पार्टियाँ): 18 सीटें — RCI 3, RSP 3, IGL 2, JKP 2, MFB 2, NCO 2, WPI 2, BBC 1, BJS 1बहुमत के लिए 140279सरकार बनाने के लिए 140
  • CPM11340.5%
  • INC10537.6%
  • CPI134.7%
  • निर्दलीय124.3%
  • SUC72.5%
  • BAC51.8%
  • FBL31.1%
  • PSP31.1%
  • अन्य186.5%
चुनाव की कहानी

मुक़ाबला क़रीबी, विधान सभा फिर त्रिशंकु

क्या हुआ

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के पास विधान सभा में सबसे ज़्यादा सीटें बनी रहीं, लेकिन एक बार फिर वह अकेले सरकार चलाने से पीछे रह गई।

पश्चिम बंगाल में माकपा ने 279 में से 113 सीटें जीतीं — विधान सभा फिर रही।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 105 सीटें जीतीं; वोटों में 32.9% के मुक़ाबले 29.2%।

क्या बदला

सीटों पर पार्टी बदलने की सबसे आम दिशा कुल परिणाम से उलटी थी।

14 सीटें माकपा से कांग्रेस के पास गईं; उस साल दो दलों के बीच यह सबसे बड़ी अदला-बदली थी।

फिर भी कुल मिलाकर 279 में से 142 सीटों पर पार्टी बदली, और माकपा की अपनी सीटें 80 से बढ़कर 113 हो गईं।

अहम आँकड़े

उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे कड़ा मुक़ाबला: खड़ग्राम, पश्चिम बंगाल का फ़ैसला सिर्फ़ 19 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम था।

साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर रानीगंज, पश्चिम बंगाल में रहा, 52.3% वोट।

सबसे कम जोड़ाबागान, पश्चिम बंगाल में रहा, 30.8%।

साल में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार फालाकाटा, पश्चिम बंगाल में उतरे, एक ही बैलट पर 8 उम्मीदवार।

पृष्ठभूमि

यह लगातार दूसरा चुनाव था जिसमें न सबसे आगे की पार्टी और न ही उसका बड़ा अपने दम पर बहुमत तक पहुँचा।

वाम दल गठबंधन के पास कुल 126 सीटें थीं, जो अकेले सरकार चलाने के लिए ज़रूरी 140 से अब भी कम थीं।

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RBI 2024-25

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