कांथी दक्षिणविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
सुधीर चन्द्र दास (PSP) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 38.7% वोट पाकर कांथी दक्षिण सीट जीती और सत्यब्रत माइति (NCO) को 4,480 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 199 मानबाजार थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 199 नंदनपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
9.5% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | सुधीर चन्द्र दास महागठबंधन | महागठबंधन | 18,16538.7% |
| 2 | सत्यब्रत माइति | 13,68529.1% | |
| 3 | कर रामशंकर वाम दल | वाम दल | 4,94010.5% |
| 4 | अधिकारी शिशिर कुमार कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 4,80610.2% |
| 5 | तबेज़ उआदिन नहम्मद निर्दलीय | निर्दलीय | 3,8038.1% |
| 6 | माइति प्राणरंजन निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5923.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.80 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कांथी दक्षिण से कौन जीता, 1967–1972
1967 से यहाँ हर चुनाव PSP ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 57.1% से घटकर 38.7% रह गया। मतदान प्रतिशत 1969 के 70.3% से घटकर 60.9% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।