हरिहरपाड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
आफ़ताबुद्दीन अहमद (निर्दलीय) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 57.4% वोट पाकर हरिहरपाड़ा सीट जीती और शुभेंदु शेखर बिस्वास (BJS) को 16,172 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 57 करीमपुर थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 57 नबग्राम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — आफ़ताबुद्दीन अहमद 35.3% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | आफ़ताबुद्दीन अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 26,30157.4% |
| 2 | शुभेंदु शेखर बिस्वास महागठबंधन | महागठबंधन | 10,12922.1% |
| 3 | सेख नजरुल इस्लाम वाम दल | वाम दल | 4,88810.7% |
| 4 | मैनुई इस्लाम बिस्वास कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 4,5389.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, BJS और CPM को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.51 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
हरिहरपाड़ा से कौन जीता, 1967–1972
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट PML से छीन ली, जिसने इसे 1969 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1969 के 70.7% से घटकर 60.4% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट SUC ने जीती।