भगवानगोलाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
मो. समाउन बिस्वास (निर्दलीय) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 32.7% वोट पाकर भगवानगोला सीट जीती और मानिन्द्र नाथ मंडई (BJS) को 4,675 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 51 भरतपुर थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 51 औरंगाबाद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
13.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मो. समाउन बिस्वास निर्दलीय | निर्दलीय | 11,64832.7% |
| 2 | मानिन्द्र नाथ मंडई महागठबंधन | महागठबंधन | 6,97319.6% |
| 3 | मोहम्मद देदार बख्श कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 6,87719.3% |
| 4 | सेकु काज़िमुद्दीन अहमद निर्दलीय | निर्दलीय | 4,33112.2% |
| 5 | मजीबर रहमान निर्दलीय | निर्दलीय | 2,4977.0% |
| 6 | राजसिंह दूगड़ महागठबंधन | महागठबंधन | 2,2766.4% |
| 7 | फजलुल सरकार BAC | BAC | 9702.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 72% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.82 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
भगवानगोला से कौन जीता, 1967–1972
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट SSP से छीन ली, जिसने इसे 1969 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1969 के 63.4% से घटकर 52.9% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।