कांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी
क्या हुआ
पश्चिम बंगाल में सरकार चला रही पार्टी सत्ता से बाहर हो गई; उसे एक ऐसी प्रतिद्वंद्वी ने हराया जिसने राज्य के परिणामों में पहले किसी भी अकेली पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 280 सीटों में से 216 सीटें जीतीं।
इससे उसे 77.1% सीटें मिलीं — भारी बहुमत, जो सरकार चलाने की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा था।
क्या बदला
राज्य की आधी से ज़्यादा सीटों पर पार्टी पिछले चुनाव से बदल गई।
कुल मिलाकर 280 में से 146 सीटों पर पार्टी बदली।
इनमें से अकेले 80 सीटें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) से कांग्रेस के पास गईं — उस साल का सबसे बड़ा बदलाव।
पहले सरकार का नेतृत्व कर चुकी माकपा इस दौरान बुरी तरह ढह गई।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला उत्तरपाड़ा, पश्चिम बंगाल में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 8 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, कालना, पश्चिम बंगाल में साल का सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 96.3% वोट से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) बेलेघाटा उत्तर, पश्चिम बंगाल में रहा, जहाँ 88.0% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
साल का सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला भी मामूली ही था: पांचला, पश्चिम बंगाल की एक सीट के लिए सिर्फ़ 7 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम ने पहले की सरकार से साफ़ नाता तोड़ा।