आड़शाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
निताई देशमुख (INC) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 50.4% वोट पाकर आड़शा सीट जीती और दमन चन्द्र कुइरी (FBL) को 217 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 223 आसनसोल थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 223 मिदनापुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
आड़शा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.8% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 217 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
2 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | निताई देशमुख कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 13,53250.4% |
| 2 | दमन चन्द्र कुइरी | 13,31549.6% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और FBL को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.00 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
आड़शा से कौन जीता, 1967–1972
INC ने 1971 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 36.3% से बढ़कर 50.4% हो गया। 1967 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1971 के 42.2% से घटकर 33.6% रह गया।