इस बार अपने दम पर बहुमत
क्या हुआ
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) आराम से दोबारा जीती, और सत्ता में उसका लंबा दौर जारी रहा।
माकपा ने कुल 294 सीटों में से 176 सीटें जीतीं।
इस तरह सरकार चला रही पार्टी लगातार 7 चुनाव जीत चुकी थी।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 37.1% रहा।
क्या बदला
इस बार माकपा की अपनी सीटें ही सहयोगियों की मदद के बिना सरकार बनाने के लिए काफ़ी थीं।
माकपा अपने दम पर बहुमत के 148 सीटों के आँकड़े से 28 सीटें आगे निकल गई।
उसके सहयोगी दलों के बड़े समूह ने इसमें और भी सीटें जोड़ीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला हरिहरपाड़ा, पश्चिम बंगाल में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 97 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, कर्सियांग, पश्चिम बंगाल 80.8% वोट के बड़े अंतर से जीती गई।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में बड़ा फ़र्क़ रहा: सबंग, पश्चिम बंगाल में यह 94.2% रहा, जबकि बड़ाबाज़ार, पश्चिम बंगाल में सिर्फ़ 42.1%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला बड़ाबाज़ार, पश्चिम बंगाल में था, जहाँ 13 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस जीत से 1977 में पहली बार सत्ता में आई सरकार का दौर और आगे बढ़ा।