बेलगछिया पश्चिमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2006
माला साहा (AITC) ने 2006 के विधान सभा चुनाव में 45.9% वोट पाकर बेलगछिया पश्चिम सीट जीती और राजदेव गोवाला (CPM) को 538 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 160 उलुबेड़िया उत्तर थी। 2006 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2011 से सीट नंबर 160 रासबिहारी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
बेलगछिया पश्चिम का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 538 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | माला साहा TMC-led Alliance (2006 Mahajot) (NDA गठबंधन) | TMC-led Alliance (2006 Mahajot) (NDA गठबंधन) | 37,71145.9% |
| 2 | राजदेव गोवाला वाम मोर्चा | वाम मोर्चा | 37,17345.2% |
| 3 | अमित कुमार घोष | 4,9756.0% | |
| 4 | मो. अजीमुल्लाह | 1,0181.2% | |
| 5 | बिजन देब निर्दलीय | निर्दलीय | 6810.8% |
| 6 | अशोक कुमार नस्कर निर्दलीय | निर्दलीय | 6120.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
AITC, CPM और INC को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.39 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बेलगछिया पश्चिम से कौन जीता, 1977–2006
AITC ने यह सीट CPM से छीन ली, जिसने इसे 2001 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1977 से शुरू होता है, यह AITC की पहली जीत थी। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 2001 के 76.8% से घटकर 67.5% रह गया।