कांग्रेस की तीसरी जीत
क्या हुआ
वही पार्टी फिर जीती, और राज्य विधान सभा पर उसकी पकड़ और लंबी हुई।
पश्चिम बंगाल में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 252 में से 157 सीटें जीतीं, और लगातार जीत का उसका सिलसिला 3 चुनावों तक पहुँच गया।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) बढ़कर 47.3% हो गया, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया 25.0% के साथ दूसरे स्थान पर बनी रही।
क्या बदला
यह पूरी तरह नए सिरे से बने एक-सदस्यीय सीटों वाले नक्शे पर हुआ पहला चुनाव भी था।
सीमाएँ फिर से (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के ज़रिए तय की गई थीं।
पहली बार हर निर्वाचन क्षेत्र ने ठीक एक सदस्य चुना; पहले कुछ मुक़ाबलों से एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
विधान सभा में अब भी कुल 252 सदस्य थे, उतने ही जितने पिछली बार, 252।
अहम आँकड़े
इस गिनती के कुछ आँकड़े जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: पांचला, पश्चिम बंगाल का फ़ैसला सिर्फ़ 19 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
सबसे बड़ा जीत का अंतर कोतुलपुर, पश्चिम बंगाल में रहा, जहाँ सबसे आगे रहा उम्मीदवार बाक़ी सबसे 63.8% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) सिंगुर, पश्चिम बंगाल में रहा, 77.1%।
उस साल सबसे ज़्यादा उम्मीदवार कालिम्पोंग, पश्चिम बंगाल के मतपत्र पर थे: कुल 8 उम्मीदवार।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम से राज्य की विधान सभा पहले वाली पार्टी के ही हाथ में रही, जो अब पूरी तरह नए रूप वाले, एक-सदस्यीय सीटों के नक्शे पर चुनी गई थी।