रघुनाथपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
शंकर नारायण सिंहदेव (INC) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 54.2% वोट पाकर रघुनाथपुर सीट जीती और चित्ता दास गुप्ता (LSS) को 7,625 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में कोई सीट नंबर 206 नहीं थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 206 केशपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — शंकर नारायण सिंहदेव 40.5% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शंकर नारायण सिंहदेव | 10,20154.2% | |
| 2 | चित्ता दास गुप्ता LSS | LSS | 2,57613.7% |
| 3 | मधुसूदन बंदोपाध्याय FB | FB | 1,92210.2% |
| 4 | जुगल चन्द्र बाउरी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5098.0% |
| 5 | ज्ञानी राम अगरवाला निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1546.1% |
| 6 | तिलक चन्द्र बाउरी निर्दलीय | निर्दलीय | 9615.1% |
| 7 | रघुनाथ माझी निर्दलीय | निर्दलीय | 5042.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, LSS और FB को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.97 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।