जयपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
अद्वैत मंडल (LSS) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 47.2% वोट पाकर जयपुर सीट जीती और नकुल चन्द्र सहिस (INC) को 2,525 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में कोई सीट नंबर 203 नहीं थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 203 पटाशपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — अद्वैत मंडल 15.2% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अद्वैत मंडल LSS | LSS | 7,85347.2% |
| 2 | नकुल चन्द्र सहिस | 5,32832.0% | |
| 3 | प्रहलाद बाउरी वाम दल | वाम दल | 1,68510.1% |
| 4 | केशरी रजवार निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0246.2% |
| 5 | यज्ञेश्वर दास निर्दलीय | निर्दलीय | 5123.1% |
| 6 | बिष्णु चरण दास निर्दलीय | निर्दलीय | 2501.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
LSS, INC और CPI को 89% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.94 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।