नबग्रामविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
बीरेन्द्र नारायण राय (निर्दलीय) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 55.0% वोट पाकर नबग्राम सीट जीती और अब्दुल बापि बिस्वास (INC) को 10,225 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 52 बेलडांगा थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 52 सूती है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — बीरेन्द्र नारायण राय 25.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बीरेन्द्र नारायण राय निर्दलीय | निर्दलीय | 21,97155.0% |
| 2 | अब्दुल बापि बिस्वास कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 11,74629.4% |
| 3 | कमल चन्द पाण्डेय | 2,3956.0% | |
| 4 | दुर्गापद सिन्हा | 2,3625.9% | |
| 5 | महासिन अली शेख निर्दलीय | निर्दलीय | 1,5083.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, INC और RSP को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.52 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
नबग्राम से कौन जीता, 1967–1972
1969 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। मतदान प्रतिशत 1969 के 67.5% से घटकर 56.2% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।