बागदाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
अपुर्व लाल मजूमदार (FBL) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 48.9% वोट पाकर बागदा सीट जीती और कान्ति चन्द्र बिस्वास (CPM) को 5,270 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 78 बरानगर थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 78 शांतिपुर है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
13.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अपुर्व लाल मजूमदार | 19,85148.9% | |
| 2 | कान्ति चन्द्र बिस्वास वाम दल | वाम दल | 14,58135.9% |
| 3 | मृणालिनी बिस्वास BAC | BAC | 5,60813.8% |
| 4 | शशधर बिस्वास महागठबंधन | महागठबंधन | 5651.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
FBL, CPM और BAC को 99% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.58 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बागदा से कौन जीता, 1967–1972
1967 से यहाँ हर चुनाव FBL ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 53.1% से घटकर 48.9% रह गया। मतदान प्रतिशत 1969 के 72.1% से घटकर 64.0% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।