बहरामपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
शंकर दास पाउई (INC) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 44.3% वोट पाकर बहरामपुर सीट जीती और प्राण रंजन चौधुरी (CPM) को 9,352 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 58 तेहट्ट थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 58 मुर्शिदाबाद है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — शंकर दास पाउई 24.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | शंकर दास पाउई कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 16,82444.3% |
| 2 | प्राण रंजन चौधुरी वाम दल | वाम दल | 7,47219.7% |
| 3 | देबब्रत बंदोपाध्याय | 5,46714.4% | |
| 4 | स्काबू अरु तैयब निर्दलीय | निर्दलीय | 4,08110.8% |
| 5 | सनत कुमार राहा वाम दल | वाम दल | 3,2368.5% |
| 6 | अमर नियोगी | 8642.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.63 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बहरामपुर से कौन जीता, 1967–1972
INC ने यह सीट CPI से छीन ली, जिसने इसे 1969 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1967 में जीत दर्ज की थी। मतदान प्रतिशत 1969 के 63.3% से घटकर 49.2% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में भी INC ने यह सीट अपने पास रखी।