डायमण्ड हारबरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
अब्दुल क़य्यूम मोल्ला (CPM) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 50.9% वोट पाकर डायमण्ड हारबर सीट जीती और दौलत अली शेख (INC) को 2,904 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 110 फोर्ट थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 110 बिष्णुपुर पूर्व है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। अब्दुल क़य्यूम मोल्ला 4.9% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | अब्दुल क़य्यूम मोल्ला वाम दल | वाम दल | 30,05450.9% |
| 2 | दौलत अली शेख कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 27,15046.0% |
| 3 | इंद्रजीत मंडल | 1,1942.0% | |
| 4 | खेमेश चन्द्र भट्टाचार्य | 6931.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
CPM और INC को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डायमण्ड हारबर से कौन जीता, 1967–1972
1967 से यहाँ हर चुनाव CPM ने जीता है: यह लगातार उसकी तीसरी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 56.7% से घटकर 50.9% रह गया। मतदान प्रतिशत 1969 के 71.7% से घटकर 69.3% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।