दांतनविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1971
पुलिन बिहारी त्रिपाठी (CPI) ने 1971 के विधान सभा चुनाव में 31.9% वोट पाकर दांतन सीट जीती और प्रद्योत कुमार महंती (NCO) को 277 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 214 बिष्णुपुर थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 214 मुगबेड़िया है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
दांतन का फ़ैसला सिर्फ़ 0.6% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 277 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पुलिन बिहारी त्रिपाठी वाम दल | वाम दल | 15,77231.9% |
| 2 | प्रद्योत कुमार महंती | 15,49531.4% | |
| 3 | दास निर्मलेंदु कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 8,41917.1% |
| 4 | नय्यर चन्द साँतरा BAC | BAC | 4,6079.3% |
| 5 | केशव परियारी निर्दलीय | निर्दलीय | 3,8417.8% |
| 6 | नब कुदर हाँसदा JKP | JKP | 1,2392.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.08 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2011 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2011 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दांतन से कौन जीता, 1967–1972
CPI ने यह सीट BAC से छीन ली, जिसने इसे 1969 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1967 से शुरू होता है, यह CPI की पहली जीत थी। मतदान प्रतिशत 1969 के 76.5% से घटकर 66.3% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट NCO ने जीती।